हिमाचल में पहली बार डॉक्टरों ने टांग की हड्डी से बनाया जबड़ा – अटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने दी कैंसर मरीज को नई जिंदगी

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान (AIMSS) के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने पहली बार ‘फ्री फिबुला फ्लैप’ तकनीक का उपयोग करते हुए मरीज के पैर की हड्डी निकालकर नया जबड़ा तैयार किया। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि अब प्रदेश के मरीजों को हाई-एंड माइक्रो-सर्जरी के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ जैसे बड़े संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

 

मरीज की कहानी: कैंसर से संघर्ष और नई उम्मीद

 

कांगड़ा जिले के थरोट निवासी 53 वर्षीय विक्रम सिंह इस सर्जरी के मुख्य पात्र हैं। वर्ष 2016 में उन्हें जीभ का कैंसर हुआ था, जिसका इलाज रेडियोथेरेपी और सर्जरी से किया गया। कुछ साल सामान्य रहने के बाद उनके जबड़े में गंभीर संक्रमण फैल गया, जिसने धीरे-धीरे हड्डी को नष्ट कर दिया। वर्ष 2024 में करीब 5 सेमी हड्डी निकालकर मेटल प्लेट लगाई गई, लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई। मेटल प्लेट बाहर दिखाई देने लगी और मरीज को खाना खाने, बोलने व सांस लेने तक में तकलीफ़ होने लगी। ऐसे में डॉक्टरों ने “फ्री फिबुला सर्जरी” करने का फैसला लिया।

 

डॉक्टरों की टीम और 9 घंटे लंबी सर्जरी

 

प्लास्टिक सर्जरी, डेंटल और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों ने मिलकर मल्टी-डिसिप्लिनरी बोर्ड तैयार किया। सर्जन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि “फ्री फिबुला फ्लैप तकनीक बेहद संवेदनशील है। इसमें टांग की पतली हड्डी (फिबुला) को निकाला जाता है, क्योंकि यह लंबी, सपाट और U-शेप में ढलने योग्य होती है, ठीक इंसानी जबड़े की तरह।”

 

सर्जरी के दौरान फिबुला हड्डी के साथ बारीक नसें और खून की नलियां भी ली गईं और उन्हें गर्दन की रक्त वाहिकाओं से जोड़ा गया। यह प्रक्रिया बेहद कठिन थी, क्योंकि खून का बहाव बाधित होने पर पूरी सर्जरी असफल हो सकती थी। डॉक्टरों की टीम ने नौ घंटे तक चले ऑपरेशन में सफलतापूर्वक हड्डी को आकार देकर जबड़े से जोड़ दिया।

 

हिमाचल में मेडिकल क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि

 

यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। अब प्रदेश में ही हाई-एंड माइक्रो सर्जरी उपलब्ध होगी, जिससे गंभीर कैंसर मरीजों को बाहर बड़े संस्थानों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

 

सर्जरी के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार हो रहा है और उनकी जिंदगी में एक नई उम्मीद जागी है।

 

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